Sunday, 5 September 2021

अनमोल वचनः

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*अंधेरे मे जब हम दीया हाथ मे लेकर चलते है तो हमे यह भ्रम रहता है कि हम दीये को लेकर चल रहे है....*

*जबकि सच्चाई एकदम उल्टी है दीया हमे लेकर चल रहा होता है ।*

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*माना दुनियाँ बुरी है*


  *सब जगह धोखा है,*


    *लेकिन हम तो अच्छे बने*


    *हमें किसने रोका है..*

     

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*मधुर वाणी बोलना*


    *एक मंहगा शौक है*


  *जो हर किसी के बस की बात नहीं*

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मुझे इस बात का कभी गम ना हो कि मेरे पास बहुत से दुनियावी सुखों की कमी है बल्कि मुझे इस बात की हमेशा ख़ुशी रहे कि दुनिया का हर सुख देने वाला सुखों का सागर परमात्मा मेरे साथ है।


🙏ओम् शांति 🙏


🎈आपका दिन शुभ हो 🎈


🇲🇰 🇲🇰


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Sunday, 16 October 2016

लक्ष्मी पूजा विधि

ध्यान (Dhyana) भगवती लक्ष्मी का ध्यान पहले से अपने सम्मुख प्रतिष्ठित श्रीलक्ष्मी की नवीन प्रतिमा में करें।
2.आवाहन (Aavahan) श्रीभगवती लक्ष्मी का ध्यान करने के बाद, निम्न मन्त्र पढ़ते हुये श्रीलक्ष्मी की प्रतिमा के सम्मुख आवाहन-मुद्रा दिखाकर, उनका आवाहन करें।
3.पुष्पाञ्जलि आसन (Pushpanjali Asana) आवाहन करने के बाद निम्न मन्त्र पढ़ कर उन्हें आसन के लिये पाँच पुष्प अञ्जलि में लेकर अपने सामने छोड़े।
4.स्वागत (Swagat) पुष्पांजलि-रूप आसन प्रदान करने के बाद, निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुये हाथ जोड़कर श्रीलक्ष्मी का स्वागत करें।
5.पाद्य (Padya) स्वागत कर निम्न-लिखित मन्त्र से पाद्य (चरण धोने हेतु जल) समर्पित करें।
6.अर्घ्य (Arghya) पाद्य समर्पण के बाद उन्हें अर्घ्य (शिर के अभिषेक हेतु जल) समर्पित करें।
7.स्नान (Snana) अर्घ्य के बाद निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को जल से स्नान कराएँ।
8.पञ्चामृतस्नान (Panchamrita Snana) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को पञ्चामृतस्नान से स्नान कराएँ।
9.गन्धस्नान (Gandha Snana) अब निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को गन्ध मिश्रित जल से स्नान कराएँ।
10.शुद्ध स्नान (Shuddha Snana) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को शुद्ध जल से स्नान कराएँ।
11.वस्त्र (Vastra) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को मोली के रूप में वस्त्र समर्पित करें।
12.मधुपर्क (Madhuparka) श्री लक्ष्मी को दूध व शहद का मिश्रण, मधुपर्क अर्पित करें।
13.आभूषण (Abhushana) मधुपर्क के बाद निम्न मन्त्र पढ़ कर आभूषण चढ़ायें।
14.रक्तचन्दन (Raktachandana) आभूषण के बाद निम्न मन्त्र पढ़ कर श्री लक्ष्मी को लाल चन्दन चढ़ायें।
15.सिन्दुर (Sindoor) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को तिलक के लिये सिन्दूर चढ़ायें।
16.कुङ्कुम (Kumkuma) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को अखण्ड सौभाग्य रूपी कुङ्कुम चढ़ायें।
17.अबीरगुलाल (Abira-Gulala) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को अबीरगुलाल चढ़ायें।
18.सुगन्धितद्रव्य (Sugandhitadravya) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को सुगन्धित द्रव्य चढ़ायें
19.अक्षत (Akshata) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को अक्षत चढ़ायें।
20.गन्ध-समर्पण/चन्दन-समर्पण (Gandha-Samarpan/Chandan-Samarpan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को चन्दन समर्पित करें।
21.पुष्प-समर्पण (Pushpa-Samarpan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को पुष्प समर्पित करें।
22.अङ्ग-पूजन (Anga-Pujan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए भगवती लक्ष्मी के अङ्ग-देवताओं का पूजन करना चाहिए। बाएँ हाथ में चावल, पुष्प व चन्दन लेकर प्रत्येक मन्त्र काउच्चारण करते हुए दाहिने हाथ से श्री लक्ष्मी की मूर्ति के पास छोड़ें।
23.अष्ट-सिद्धि पूजा (Ashta-Siddhi Puja) अङ्ग-देवताओं की पूजा करने के बाद पुनः बाएँ हाथ में चन्दन, पुष्प व चावल लेकर दाएँ हाथ से भगवती लक्ष्मी की मूर्ति के पास ही अष्ट-सिद्धियों की पूजा करें।
24.धूप-समर्पण (Dhoop-Samarpan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को धूप समर्पित करें।
मन्त्र अर्थ - अर्थात्-वृक्षों के रस से बनी हुई, सुन्दर, मनोहर, सुगन्धित और सभी देवताओं के सूँघने के योग्य यह धूप आप ग्रहण करें। ॥भगवती श्रीलक्ष्मी के लिये मैं धूप समर्पित करता हूँ 25.दीप-समर्पण (Deep-Samarpan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को दीप समर्पित करें।
मन्त्र अर्थ - हे देवेश्वरि! घी के सहित और बत्ती से मेरे द्वारा जलाया हुआ, तीनों लोकों के अँधेरे को दूर करनेवाला दीपक स्वीकार करें। मैं भक्ति-पूर्वक परात्परा श्रीलक्ष्मी-देवी को दीपक प्रदान करता हूँ। इस दीपक को स्वीकार करें और घोर नरक से मेरी रक्षा करें। ॥भगवती श्रीलक्ष्मी के लिये मैं दीपक समर्पित करता हूँ॥ 26.नैवेद्य-समर्पण (Naivedhya-Samarpan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को नैवेद्य समर्पित करें।
मन्त्र अर्थ - शर्करा-खण्ड (बताशा आदि), खाद्य पदार्थ, दही, दूध और घी जैसी खाने की वस्तुओं से युक्त भोजन आप ग्रहण करें। ॥यथा-योग्य रूप भगवती श्रीलक्ष्मी को मैं नैवेद्य समर्पित करता हूँ - प्राण के लिये, अपान के लिये, समान के लिये, उदान के लिये और व्यान के लिये स्वीकार हो॥ 27.आचमन-समर्पण/जल-समर्पण (Achamana-Samarpan/Jal-Samarpan ) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए आचमन के लिए श्रीलक्ष्मी को जल समर्पित करें।
28.ताम्बूल-समर्पण (Tambool-Samarpan) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को ताम्बूल (पान, सुपारी के साथ) समर्पित करें।
29.दक्षिणा (Dakshina) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को दक्षिणा समर्पित करें।
30.प्रदक्षिणा (Pradakshina) अब श्रीलक्ष्मी की प्रदक्षिणा (बाएँ से दाएँ ओर की परिक्रमा) के साथ निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को फूल समर्पित करें।
31.वन्दना-सहित पुष्पाञ्जलि (Vandana-Sahit Pushpanjali) अब वन्दना करे और निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को पुष्प समर्पित करें।
32.साष्टाङ्ग-प्रणाम (Sashtanga-Pranam) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए श्रीलक्ष्मी को साष्टाङ्ग प्रणाम (प्रणाम जिसे आठ अङ्गों के साथ किया जाता है) कर नमस्कार करें।
33.क्षमा-प्रार्थना (Kshama-Prarthana) निम्न-लिखित मन्त्र पढ़ते हुए पूजा के दौरान हुई किसी ज्ञात-अज्ञात भूल के लिए श्रीलक्ष्मी से क्षमा-प्रार्थना करें।
मन्त्र अर्थ - न मैं आवाहन करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो। यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों। ॥भगवती श्रीलक्ष्मी को यह सब पूजन समर्पित है॥

Friday, 17 January 2014

Tanhai

Tanhayi le jati hai jaha tak. Yad tumhari, Wahi se suru hoti hai

Thursday, 9 January 2014

friendship

Life is boing but enjoy olnly great work and friendship. Friendship is connected people for sharing life expeience,feeling,and both social and economic help each other.